6-दिवसीय कायाकल्प शिविर
शरीर, मन और आत्मा
का नवजीवन
पंचतत्व के संग, प्रकृति की गोद में 6 दिवसीय सम्पूर्ण शुद्धि और जीवन संतुलन का अनुभव करें।
6-दिवसीय कायाकल्प शिविर
पंचतत्व के संग, प्रकृति की गोद में 6 दिवसीय सम्पूर्ण शुद्धि और जीवन संतुलन का अनुभव करें।
आत्मीयता से आरोग्य की ओर
पंच तत्व आश्रम में 6 दिवसीय सेवापैथी साधना के माध्यम से ऐसा आत्मीय एवं सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार किया जाता है, जहाँ साधक एक परिवार की तरह रहते हैं। साथ उठते हैं, साथ हँसते हैं, साथ भोजन करते हैं और एक-दूसरे के सहयोगी बनते हैं।
यहाँ व्यक्ति फिर से अपने लिए जीना, मुस्कुराना और जीवन के छोटे-छोटे सुंदर पलों को महसूस करना सीखता है।
“यही भाव, यही अपनापन और यही अहसास—सेवापैथी है।”स्वामी विवेकानंद के विचारों के अनुरूप पंच तत्व आश्रम का पावन सेवा सिद्धांत
— स्वामी विवेकानंद के विचारों पर आधारित“मनुष्य की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। यदि किसी भूखे व्यक्ति को भोजन, बीमार को उपचार या दुखी व्यक्ति को सहारा दिया जाता है, तो यह ईश्वर की पूजा के समान है।”
“धर्म का वास्तविक रूप सेवा और करुणा में दिखाई देना चाहिए।”
पंच तत्व आश्रम के इस 'सेवापैथी साधना शिविर' का उद्देश्य है कि आप और आपका परिवार आजीवन स्वस्थ रहे और आनंदमय जीवन जिए। इस शिविर के दौरान साधकों के उत्तम आवास, सात्विक भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए आश्रम एक निश्चित बुनियादी लागत को वहन करता है।
“आपका खर्च आश्रम तथा पिछले किसी साधक ने उठाया था, यदि आपमें भी सेवा, सहयोग एवं समर्पण की भावना है तो आप भी आने वाले साधकों के लिए उत्तम व्यवस्था में आर्थिक सहयोग करें।”
आश्रम में प्रत्येक साधक के रहने, भोजन, चिकित्सा और साधना की व्यवस्थाएँ पूर्व साधकों के उदार सहयोग से ही संभव हो पाती हैं। यह पावन परंपरा हर साधक को आरोग्य, कृतज्ञता और नि:स्वार्थ सेवा के सूत्र में पिरोती है।
“नर सेवा नारायण सेवा का भाव यह है कि किसी इंसान की सच्ची, निःस्वार्थ सेवा करना भगवान की सेवा करने के बराबर है।”
सेवा करते समय अहंकार नहीं होना चाहिए कि “मैं किसी पर उपकार कर रहा हूँ।” बल्कि यह भाव होना चाहिए कि मुझे नारायण की सेवा करने का अवसर मिला है। किसी इंसान की सच्ची, निःस्वार्थ सेवा करना ईश्वर की प्रत्यक्ष पूजा है।
“सेवा से आत्मा को शांति और जीवन को सच्चा संतुलन प्राप्त होता है।”
“आपका खर्च आश्रम तथा पिछले किसी साधक ने उठाया था, यदि आपमें भी सेवा, सहयोग एवं समर्पण की भावना है तो आप भी आने वाले साधकों के लिए उत्तम व्यवस्था में आर्थिक सहयोग करें।”
तीन आधार
छह दिन का अनुभव
छह दिन — स्वयं के साथ, प्रकृति के साथ और एक परिवार के साथ
शरीर और श्वास को संतुलित करने वाली सरल दिनचर्या।
प्रकृति आधारित जीवनशैली और स्वास्थ्य जागरूकता।
योग परंपरा से जुड़ी उपयोगी शुद्धि विधियों का परिचय।
अनुकूल अभ्यासों और शारीरिक संतुलन की जानकारी।
सजग भोजन, मित आहार और प्राकृतिक स्वाद का अनुभव।
स्वास्थ्य, आहार, दिनचर्या और अनुशासन पर सहज मार्गदर्शन।
मन में प्रसन्नता, सद्भाव और संतुलन जगाने का अभ्यास।
एक-दूसरे के सहयोगी बनकर परिवार जैसा अनुभव।
साथ उठना, साथ चलना और अनुशासित वातावरण में रहना।
स्वयं से जुड़ने और भीतर शांति अनुभव करने का अवसर।
इन छह दिनों में आपको केवल जानकारी नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित जीवनशैली का प्रत्यक्ष अनुभव कराया जाता है, जिसे आप अपने दैनिक जीवन में भी आसानी से अपना सकें।
अपनापन और सहयोग
अलग-अलग स्थानों से आए साधक छह दिनों तक साथ रहते हैं, साथ भोजन करते हैं, अभ्यासों में भाग लेते हैं, अनुभव साझा करते हैं और एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। यह वातावरण व्यक्ति को सहज, प्रसन्न और आत्मीय महसूस कराता है।
“ये छह दिन इतनी जल्दी कैसे बीत गए!”
मूल अवधारणा
यही सेवापैथी की मूल अवधारणा है। यह शरीर, मन और जीवनशैली को एक साथ देखने का संतुलित प्रयास है।
अनुभव और प्रयोगों की यात्रा
सेवापैथी साधना श्री सी.एम. बीजाका (F.C.A.) के 44 वर्षों — जुलाई 1975 से दिसंबर 2019 — के शोध, अनुभव एवं प्रयोगों का प्रतिफल है।
इसमें योग-ध्यान साधना, प्राकृतिक एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों तथा विभिन्न योगाचार्यों, चिकित्सकों, सेवा आश्रमों और धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से प्राप्त अनुभव एवं ज्ञान को भी आधार बनाया गया है।
संस्थापक एवं मुख्य मार्गदर्शक
प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट, समाजसेवी एवं समर्पित आध्यात्मिक मार्गदर्शक।
प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विशेषज्ञ
योगाचार्य, रिसर्चर एवं प्राकृतिक चिकित्सक।
स्वस्थ जीवनशैली की ओर
स्वस्थ जीवनशैली केवल शरीर तक सीमित नहीं होती। मन, विचार, आहार, दिनचर्या, सेवा और समर्पण भी व्यक्ति के wellbeing में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेवापैथी साधना का उद्देश्य स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, प्राकृतिक जीवनशैली और सकारात्मक जीवन दृष्टि को सहयोग देना है।
आइए, 6 दिन स्वयं को दें